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अभी-अभी: 3 तलाक के ऐतिहासिक फैसले के बाद मुस्लिम महिला ने की शिव की पूजा, मुल्लाओं में मचा हडकंप.. देखें...

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नई दिल्ली: तीन तलाक  पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले दिन पूरे देशभर की मुस्लिम महिलाओं में बेचौनी थी। कोई टीवी के सामने चिपका बैठा था तो कोई मुस्लिम होकर भी धर्म को दरकिनार कर भगवान राम और हनुमान चालिसा का पाठ कर रहा था। फैसला आने के बाद मिठाई बांटी गई पटाखे जलाए गए। मुस्लिम महिलाओं ने कहा- भगवान ने दे ही दी हमें आजादी।

बता दें कि 22 अगस्त 2017 का दिन मु्स्लिम महिलाओं के लिए आजादी का दिन बन गया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 22 अगस्त को तीन तलाक पर ऐतिहासिक फैसला देने के एक दिन पहलेतीन तलाक खत्म हो सके इसके लिए मुस्लिम  महिलाओं ने 108 बार 'हनुमान चालीसाका भी उच्चारण किया। तीन तलाक के संकट से मुक्ति के लिए मुस्लिम महिला फाउंडेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी ने भगवान श्रीराम की आरती की। इतना ही नहीं फैसला पक्ष में  आने के बाद मुस्लिम महिलाओं ने भगवान राम की आरती की और भजन गाया।
मंगलवार का दिन देवता का शुभ दिन माना जाता है। जब कोर्ट के 5 धर्मों के 5 जजों ने तीन तलाक पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया तो मुस्लिम महिलाओं का कहना है कि हनुमान ने उनकी प्रार्थना सुन ली और उन्हें आशीर्वाद दिया है।22 अगस्त का दिन मुस्लिम महिलाओं का स्वतंत्रता का दिन है। एमएमएफ के अध्यक्ष नजनेन अंसारी ने कहा हैजो दिसंबर 2013 के बाद से तीन तलाक संघर्ष का नेतृत्व कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि "हम पूरी तरह से अदालत के फैसले का स्वागत करते हैं और कानून के प्रारंभिक कानून की उम्मीद करते हैं।" उन्होंने कहा कि तीन तलाक से स्वतंत्रता अमानवीय दासता और अंधेरे से मुक्ति की तरह है। कानून लागू होने तक ये लड़ाई जारी रहेगी। शबाना बानोरिजवानगुड़ीया कुरेशीनजमा पारविन सहित सभी महिलाओं ने इस फैसले का स्वागत किया।
नाजनीन ने कहा कि मुझे यकीन था कि हनुमान जी तीन तलाक के संकट से जरूर मुक्ति दिलाएंगे। सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम महिलाओं की तकलीफ और दुर्दशा को समझेगी। हलाला जैसी कुप्रथा को कानूनन बलात्कार घोषित किया जाना चाहिए।मुस्लिम महिलाओं ने आगे कहा कि आज वो दिन आ गया है जह हमें भी हमारा अधिकार मिलेगा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि समय आ गया है जब हम सामाजिक कुप्रथाओं को खत्म कर प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ें।तीन तलाक गैर इस्लामी हैयह शैतान का रास्ता है। तीन तलाक देकर औरत की जिंदगी बर्बाद करने वाले धर्म को मानने वाले नहीं हो सकते।

वहीं पातालपुरी मठ के पीठाधीश्र्वर बाबा बालकदास ने कहा कि जिस तरह के अत्याचार से मुस्लिम महिलाओं को सभ्य समाज में जूझना पड़ रहा हैवो अशोभनीय है। धर्म का काम विपत्ति में राह दिखाना हैशोषण करना नहीं। नाजनीन अंसारी के समर्थन में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय सेवा प्रमुख डा. राजीव श्रीवास्तव आदि पहुंचे थे।


बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों ने मिलकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले में तीन तलाक पर कानून बनने तक रोक लगा दी गई है। संविधान खंड ने 1400 साल पुरानी प्रथा को चुनौती देने वाली सात याचिकाओं पर फैसला सुना दिया है।
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