मनमोहन सरकार में हुआ दुनिया का सबसे बड़ा घोटाला,26 लाख करोड़ कलाम ने भी उठाए थे सवाल...देखे रिपोर्ट
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आज हम कोयला घोटाले से भी बड़े घोटाले के बारे में बता रहे हैं। यह घोटाला कोयला घोटाले से भी खतरनाक है, क्योंकि इसमें न स़िर्फ देश के बहुमूल्य खनिज की बंदरबांट हुई, बल्कि इस घोटाले का असर हिंदुस्तान के भविष्य पर भी होगा। सबसे पहले समझते हैं कि यह थोरियम क्या है। थोरियम एक रेडियोएक्टिव पदार्थ है, जिसका इस्तेमाल न्यूक्लियर रिएक्टर में ईंधन की तरह होता है।
समुद्र तटों से निजी कंपनियों द्वारा थोरियम की लूट हो रही है और सरकार इस बात से अनजान है। पहले यह समझते हैं कि कैसे देश को 48 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और कैसे देश के बहुमूल्य खनिजों को गैरक़ानूनी तरीके से विदेश भेजा गया। 30 नवंबर, 2011 को कोडीकुनेल सुरेश ने लोकसभा में प्रधानमंत्री से सवाल पूछा। सवाल यह था कि देश से जो मोनाजाइट निर्यात किया जा रहा है, क्या उसमें किसी क़ानून का कोई उल्लंघन हुआ है या नहीं? इस पर पीएमओ के मिनिस्टर ऑफ स्टेट वी नारायणसामी ने जवाब दिया कि मोनाजाइट को छोड़कर समुद्र तट की बालू, जिसमें कुछ खनिज हैं, का निर्यात किया जा रहा है, क्योंकि मोनाजाइट और थोरियम के निर्यात के लिए लाइसेंस दिया जाता है और अब तक किसी कंपनी को इसे निर्यात करने के लिए लाइसेंस नहीं दिया गया है।
मुताबिक, 2004 में मनमोहन सिंह की सरकार बनी, तबसे अब तक 2।1 मिलियन टन मोनाजाइट भारत से गायब कर दिया गया है। मोनाजाइट उड़ीसा, तमिलनाडु और केरल के समुद्र तटों पर मौजूद बालू में पाया जाता है। मोनाजाइट में करीब दस फीसदी थोरियम होता है। इसका मतलब यह कि करीब 1,95,000 टन थोरियम गायब कर दिया गया। माइंस एंड मिनरल एक्ट 1957 के तहत उड़ीसा सैंड कॉम्प्लेक्स, तमिलनाडु में कन्याकुमारी के पास मानवालाकुरिची और केरल में अलूवा-चावरा बेल्ट को मोनाजाइट के लिए चिन्हित किया गया था। मोनाजाइट से थोरियम निकालने का अधिकार स़िर्फ इंडिया रेयर अर्थ लिमिटेड को है। यह एक पब्लिक सेक्टर कंपनी है
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